The Power of Faith Inspirational Story in Hindi

सभी पाठको को मेरा नमस्कार,

दोस्तों विस्वास उस शक्ति का नाम है जिस शक्ति के बल पर कोई भी इंसान कुछ भी कर सकता जीवन में बड़ी से बड़ी कामयाबी पा सकता है आइये आज इसी तरह की एक कहानी शेयर करने जा रहा हूँ आपके साथ-

किसी देश में एक पुजारी रहा करते थे पुजारी को अपने आप और अपने कर्म पर पूरा भरोसा था व अपनी अध्यात्मिक शक्ति में अटल विस्वास था पुजारी जी लोगो से बड़ा लगाव रखते थे जो कोई भी उनके घर में एक बार आ जाता वो उनके आथित्य और सत्कार के प्रभाव से बहुत प्रभावित हो जाता था.

पुजारी जी के लिए लोगो के मन में अथाह प्रेमभाव था इसलिए लोग उनका बहुत सम्मान भी करते थे और उनसे प्रेरित हो कर जीवन में अच्छा काम करते थे एक दिन जेल से भागा हुआ चोर रात में शरण लेने के लिए इधर उधर घूम रहा था चोर को जब कही भी रुकने की कोई जगह नहीं मिली तब वह पुजारी के घर चला आया.

चोर ने देखा कि पुजारी के घर का दरवाजा खुला हुआ है इसलिए वो उस और चला गया और घर में प्रवेश कर गया पुजारी ने उसे देखते ही उसका अभिवादन किया और उस से कहा तुम्हारा मेरे इस घर में स्वागत है मेरे भाई लेकिन तुम ये बताओ तुम कौन हो और यंहा क्या करने आये हो इस पर चोर ने सफेद झूट बोलते हुए कहा मैं एक मुसाफिर हूँ और रास्ता भटक गया हूँ सो इधर उधर भटक रहा था और आपके घर का दरवाजा खुला हुआ देखा तो इस और चला आया.

फिर चोर ने पूछा क्या मुझे सिर छुपाने के लिए जगह मिल सकती है मैं सुबह होते ही यंहा से चला जाऊंगा पुजारी ने उस से कहा हाँ क्यों नहीं तुम यंहा आराम से रह सकते हो और मुझे लगता है तुम बहुत थक गये हो इसलिए तुम जाकर आराम से हाथ मुहं धो लो मैं तुम्हारे सोने और खाने का प्रबंध करता हूँ.

इस पर चोर पुजारी का आभार व्यक्त करते हुए स्नान करने चला गया और पुजारी ने चोर के खाने और सोने की व्यवस्था कर दी पुजारी ने उसका बहुत अच्छे से आथित्य सत्कार किया और उसे अच्छा भोजन करवाकर उसके सोने की व्यवस्था कर दी पुजारी को भी पता चल गया था की यह एक चोर है और पुलिस इसकी खोज कर रही है लकिन पुजारी को अपने विस्वास की शक्ति पर पूरा भरोसा था.

सभी के सो जाने के बाद चोर के मन में चोरी की ईच्छा जागृत हुई और उसने पुजारी के घर से सोने के दो दीपदान चुराकर वंहा से निकल भागा रात में पुलिस उसकी तलाश में ही थी सो वो पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो पूछताछ में उसने बता दिया कि मैंने ये पुजारी के घर से चुराए है इस पर उसे पुजारी के सामने लाया गया.

इस बात पर पुजारी ने पुलिस वालों से कहा आप कृपया इन्हें छोड़ दीजिये ये मेरे घर में मेहमान के तौर पर आये थे और मैंने ये दीपदान इन्हें उपहार के तौर पर दिए है पुजारी ने ये सब इसलिए कहा की मैंने जैसे इस चोर का आदर सत्कार किया है मुझे विस्वास है यह जर्रूर बदल जायेगा यह सुन कर पुलिस ने चोर को माफ़ कर दिया.

सब कुछ देख कर चोर के ज्ञानचक्षु खुल गये और उसे अपनी भूल का अहसास होने लगा पुजारी की उदारता देखते हुए चोर के मन में पश्चाताप होने लगा और उसने माफ़ी मांग कर कभी फिर से चोरी नहीं करने का वचन दिया.

इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की हमे अपने कर्म और अपने आप पर विस्वास होना चाहिए और अंतर आत्मा में शक्ति हो तो किसी भी आदमी को बदला जा सकता है.

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