An Inspirational Story on Life in Hindi

ये कहानी है एक रुपया की जिससे पढ़ कर आप को लगेगा की one rupee inspirational story in hindi की क्या कीमत होती है.

वैसे तो आज के time में इसकी कोई बड़ी value नहीं है but पहले ज़माने में एक रुपया की बहुत कीमत हुआ करती थी.

में आज आपके साथ एक ऐसी ही inspirational story शेयर कर रहा हुँ जिसमे जीवन की वास्तविकता छुपी हुई है.

आप ये जानकर जर्रूर प्रभावित होंगे की एक महापुरुष के लिए दौलत कोई भी मायने नहीं रखती और एक दरिद्र के लिए कितनी.

इस स्टोरी में एक और जहां महात्मा ने एक रुपया भी किसी जर्रुरत मंद को देने का निर्णय लिया.

वही दूसरी और एक राजा ने अपनी धन सम्पति को बढ़ाने के लिए किसी दूसरों का माल छीनने की कोशिश की.

आइए, Inspirational Story on Life वो कहानी जानते है जो आपको बहुत कुछ सिखा सकती है पुराने समय की बात है एक साधू महात्मा भ्रमण पर निकले हुए थे.

रास्ते में चले जा रहे थे चलते चलते किसी नगर से होकर जाना था उसी शहर में उन्हें एक रुपया का नोट रास्ते में पड़ा मिला.

बाबा ने वो नोट उठा लिया और चल दिए, महात्मा संतोष से भरे व्यक्ति थे भला एक रूपये का क्या करते इसलिए उन्होंने यह रुपया किसी गरीब आदमी को देने की सोची.

महाराज ने पुरे नगर में खोजवीन की लेकिन उन्हें कोई भी ऐसा दरिद्र नहीं दिखा जिसकी वो तलाश कर रहे थे जिसे वो रुपया दे सके.

फिर एक दिन की बात है महाराज अपने दैनिक क्रिया कर्म के लिए सुबह सुबह उठते है तो उस दिन क्या देखते है.

अपनी बहुत बड़ी सेना के साथ एक राजा दूसरे राज्य पर हमला करने जा रहा है और उनके आश्रम के सामने से जा रहा था महात्मा ये सब देख रहे थे.

यह देख ऋषि आश्रम से बाहर को आये तो उन्हें देखकर राजा ने अपनी सेना को रुकने का आदेश दिया.

और राजा खुद आशीर्वाद के लिए ऋषि के पास आकर बोले महात्मन मैं दूसरे राज्य को जीतने के लिए जा रहा हूँ ताकि मेरा राज्य विस्तार हो सके.

इसलिए आप मुझे ऐसी शक्ति और आशीर्वाद प्रदान करें जिससे में दूसरों के राज्यों को अपने राज्य में विलय कर सकू.

और मेरा राज्य इस देश का सबसे बड़ा हो और मेरी प्रजा आराम से रह सके ताकि आगे चल कर मेरे राज्य में कोई भी समस्या उत्पन न हो.

यह सुन कर ऋषि ने काफी देर सोचा और सोचने के बाद वो एक रुपया राजा की हथेली में रख दिया.

राजा यह देख कर थोड़ा सा हेरान और नाराज भी हुआ लेकिन उन्हें इसके पीछे का प्रयोजन काफी देर तक सोचने के बाद भी समझ नहीं आया.

कुछ time बाद राजा ने बाबा से इसका कारण पूछा तो महात्मा ने राजा को बड़ी सहजता से उत्तर दिया.

कि हे राजन में कई दिनों से ये एक रुपया देने के लिए किसी दरिद्र ढूंढ रहा था लेकिन कोई नहीं मिला.

परन्तु आज तुम्हे देखकर ये ख्याल आया कि तुमसे दरिद्र तो कोई है ही नहीं इस राज्य में सबकुछ होने के बाबजूद तुम किसी दूसरे बड़े राज्य के लिए भी लालसा रखते हो, जी हाँ जितना आपने पास है उतने में संतोष करे.

इसलिए मैंने तुमे ये एक रुपया दिया है राजा को महाराज की बात से प्रेरणा मिली lalach buri bala और अपनी गलती का अहसास हो गया और उसने युद्ध का विचार भी त्याग दिया.

वही से अपनी बड़ी सेना के साथ अपने राज्य वापस लौट गया.

जी हाँ कोई भी इन्सान अपनी दौलत और पैसे से बड़ा और महान नहीं होता बल्कि अपनी कुछ अच्छी और नेक नियत से महान होता है.

आप भी अपने जीवन में कुछ ऐसा ही करिये जिससे लोग आपसे अच्छी उम्मीदें रख सके. धन्यवाद

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