चोर से सीखा Motivational Story Hindi Me

Success In Hindi (SIH) के सभी पाठकों को नमस्कार,

दोस्तों, कभी भी कुछ सीखने के लिए किसी बड़ी घटना का होना जरुरी नहीं कुछ जीवन में छोटी घटनाएं भी हमें बहुत कुछ सिखा जाती हैं ऐसी ही एक घटना हम चोर से सीखा motivational story के माध्यम से आप तक पहुंचा रहे हैं जो आपके जीवन में बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है.

chor se sikha motivational story in hindi

एक बात आपने बहुत अच्छे से पढ़ी और सुनी होगी अपनी family से या दोस्तों से या हो सकता है स्कूल में की सिखने की कोई उम्र नहीं होती है जब कभी भी कही भी कोई नई चीज़ सिखने को मिल रही हो इस दुनिया का नियम कहता है सिख लो.

वैसे तो एक इंसान जब से पैदा होता है तब से और जब तक वो मरता है रोजाना कुछ न कुछ अपनी life में अपने अंदर self improvement करता रहता है और जिंदगी में हर पल में एक अलग अहसास करता है जैसे मरते हुए आदमी को भी एक अलग अनुभव होता है.

आइये आज आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे है जिसे पढ़ कर आपके अपने अंदर एक positive ऊर्जा का अहसास होगा.

हम बात कर रहे है कुछ सिखने की – एक संत थे जो आत्म-ज्ञान की शिक्षा के लिए भ्रमण कर रहे थे, चलते चलते रास्ते में रात हो जाने के कारण एक सराय में ठहरने के लिए जगह मांगी सराय मालिक ने कहा की हम अजनबी को नहीं ठहराते है.

जाओ पहले किसी परिचित को लेकर आओ उसके बाद हम आपको यहाँ रात भर रोक सकते है यह सुनकर संत परेशान हो गए की एक अनजान जगह कैसे कोई मेरा जानने वाला मिलेगा.

संत कुछ देर कोशिश करने के बाद एक पेड़ के नीचे बैठ कर रात गुजारने की सोचने लगे इतने में एक राहगीर दिखाई दिया जो एक चोर था और चोरी के इरादे से कहीं जा रहा था संत ने उसे रोक कर कहा भाई यदि आप सराय मालिक से मेरी पहचान करा दे तो रात्रि विश्राम की जगह वहां मिल जाएगी.

पास में जाकर उस व्यक्ति ने कहा, महाराज पहले आप मेरा परिचय जान लें मैं एक चोर हूं मेरे परिचय पर तो सराय मालिक शायद ही आपको ठहरने दे किंतु मेरा एक सुझाव है कि रात मेरे घर में ठहर जाइए मैं चोरी करने जा रहा हूं घर खाली पड़ा है.

महात्मा ने सोचा सराय मालिक से अच्छा तो यह चोर है जो एक अजनबी को अपने घर ठहरने की अनुमति दे रहा है संत चोर के घर ठहर गया प्रात-काल चोर घर लौटा संत ने पूछा कुछ मिला चोर ने हंसते हुए कहा आज तो कुछ नहीं कल फिर कोशिश करूंगा चोर ना परेशान था, ना निराश, ना चिंतित.

संत महीने भर चोर के घर रुके चोर रोज खाली हाथ लौटता और संत के पूछने पर यही उत्तर देता आज नहीं मिला कल फिर कोशिश करूंगा संत ने चोर को धन्यवाद दिया कि उसी के असफल प्रयासों से उन्हें स्वयम प्रेरणा मिली.

संत ने सोचा अगर में भी कोशिश करता की कोई न कोई मेरे जानने वाला मिल ही जायेगा यदि में कुछ देर और इधर उधर खोज करता और मुझे भी सराय में रुकने का मौका मिल जाता चोर की कार्यशीलता, निरंतर प्रयास, संत के आत्म-ज्ञान प्राप्ति में सहायक बने.

जैसे कि हम पहले भी कई स्टोरी में आपको बता चुके हैं कि निरंतर प्रयासों से ही सफलता मिलती है अगर Jack Ma ने प्रयास ना किए होते तो आज अलीबाबा ग्रुप नहीं होता और अगर Thomas Edison ने प्रयास ना कि होते तो हम अपने घर में कभी बल्ब की रोशनी नहीं पा सकते थे.

गीता में सही कहा गया है, कि कर्म करो फल की प्रतीक्षा मत करो अगर सच्चे मन और लगन से किसी कार्य को करने की ठान ली है तो वह अवश्य पूरा होगा आप कभी निराश नहीं होंगे केवल दो बातें होंगी या तो आप जीत कर आओगे या फिर सीख कर.

विचारशील लोग सामान्य घटनाओं से भी शिक्षा ग्रहण करके अपने जीवन में धारण करते हैं यदि हम सोचने का तरीका बदल डालें, खिलाडी की भावना रखकर जिंदगी का खेल खेलें नाटक के पात्रों की तरह अभिनय का आनंद लेते हुए दिन गुजारे.

बुराई में से भलाई और निराशा में से आशा की किरणें खोजने का अभ्यास करें, तो कोई कारण नहीं कि हम विपरीत परिस्थितियों और अज्ञानी से सीख ग्रहण न कर सके.

हम जहाँ रह रहे हैं उसे नहीं बदल सकते, पर अपने आप को बदलकर हर स्थिति में सुखी रह सकते हैं.

कहानी की सीख: हम अगर किसी काम को करते है और लगातार कार्यरत रहते है तो उस काम में हम जरूर सफल होते है बस आवश्यकता है तो निरंतर प्रयास की और अपने ऊपर विस्वास की. ये कहानी आपको कैसी लगी हमे comment करके जरूर बताये. धन्यवाद

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